उज्जैन। कथित शिकायत पर गुरूवार देर रात पुलिस ,जीआरपी उज्जैन –नागदा ,श्रम विभाग,महिला बाल विकास विभाग की टीम ने अंत्योदय एक्सप्रेस से बिहार के दरभंगा से संबंधित 20 नाबालिग सहित 44 लोगों को उज्जैन एवं नागदा स्टेशन पर उतार लिया गया। ये सभी गुजरात के अहमदाबाद जा रहे थे। बाल श्रम एवं तस्करी की एक एनजीओं की कथित शिकायत कार्रवाई में झूठी निकली। इसके बाद सभी 44 लोगों की यात्रा में विध्न एवं संकट की स्थिति बन गई। शुक्रवार दोपहर सभी उज्जैन से अपने स्वयं के व्यय पर अहमदाबाद रवाना हुए ।
गुरूवार रात को आकस्मिक रूप से पुलिस के साथ श्रम विभाग एवं अन्य दल के रूप में उज्जैन स्टेशन पर पहुंचे थे। दल ने यहां रात 11 बजे अंत्योदय एक्सप्रेस से 4 युवकों को स्टेशन पर जानकारी के लिए उतार लिया था। समय बद्ध स्थिति में इस कार्रवाई के दौरान ही ट्रेन आगे के लिए रवाना हो गई। ऐसे में ट्रेन को नागदा जीआरपी,एवं पुलिस को सूचना के साथ वहां रूकवाया गया। ट्रेन की चेकिंग करीब एक घंटे तक की जाकर 20 नाबालिग बच्चों सहित उनके पालक एवं रिश्तेदारों के रूप में उज्जैन सहित कुल 44 लोगों को ट्रेन से उतार लिया गया। रात भर जांच के बाद पूरा मामले में बाल श्रम एवं तस्करी जैसा मामला अन्यानेक प्रकार की पूछताछ एवं जांच के बाद भी सामने नहीं आया।
गरीब के 16 सौ के हजार हुए-
ट्रेन से 44 से अधिक लोगों को उज्जैन एवं नागदा में स्थानीय पुलिस की सहायता से उतार लिया गया था। सभी को उज्जैन में इकट्ठा किया गया । देर रात में ही जांच की गई। दस्तावेज के साथ बयान लिए गए। हर प्रकार से अधिकारियों ने जांच की उसके बाद भी कुछ हाथ नहीं लगा। ऐसे में बिहार के दरभंगा से अहमदाबाद जा रहे सभी गरीब तबके के इन लोगों के अहमदाबाद जाने के लाले पड गए। जीआरपी के सूत्रों के अनुसार सुबह सभी को श्रम विभाग के कुछ लोग नाश्ता एवं चाय करवाने ले गए थे बाद में उन्हें खाना खिलाकर ही लाया गया। दोपहर में सभी समर स्पेशल ट्रेन से अहमदाबाद के लिए अधिकांश खूद ही टिकिट लेकर रवाना हुए हैं ।
बगैर आधार की शिकायत –
इधर सामने आ रहा है कि पूरे मामले में बगैर आधार की शिकायत पर ही इतना बडा टंटा किया गया कि उज्जैन एवं नागदा में श्रम विभाग ने पुलिस के साथ मिलकर ट्रेन को रूकवा दिया । कथित सूचना को लेकर कोई पुष्टिकारक साक्ष्य भी नहीं देखे गए । आधी रात को 20 नाबालिग बच्चों के साथ उनमें से कुछ के पालक एवं रिश्तेदारों सहित करीब 44 से अधिक लोगों को उतार लिया गया। चाईल्ड वेलफेयर नामक एनजीओं की बाल श्रम एवं तस्करी की बगैर आधार की सूचना पर यह कार्रवाई की गई। खास तो यह है कि एनजीओं ने 100 बच्चों की ट्रेन से तस्करी की सूचना थी। श्रम विभाग की सूचना पर देवासगेट पुलिस सीएसपी दिपिका शिंदे के साथ उज्जैन स्टेशन पहुंची थी । ट्रेन से 3 व्यस्क एवं एक अव्यस्क को उतार लिया गया था। नागदा में सीएसपी विक्रमसिंह के साथ नागदा के दोनों थानों का बल स्टेशन पहुंचा और वहां पहुंचने पर ट्र्रेन की पूरी सर्चिंग करते हुए यहां से 20 नाबालिग सहित उनमें से कुछ के पालक एवं रिश्तेदारों सहित करीब 40 लोगों को उतार लिया गया। रात में ही दुसरी ट्रेन से इन सभी को उज्जैन भेजा गया। यहां अधिकारियों ने नाबालिग सहित उनमें से कुछ के पालकों एवं रिश्तेदारों से पूछताछ की और हर प्रकार से दस्तावेज देखने के बाद सुबह जांच इस निष्कर्ष पर पहुंची की सूचना जैसा कुछ नहीं हैं।
बच्चों एवं पालकों के सामने संकट खडा हुआ-
उज्जैन में अधिकारियों की कई घंटों की जांच में कुछ भी सामने नहीं आया । ऐसे में बिहार से गुजरात के अहमदाबाद की यात्रा पर निकले बच्चे एवं उनके गरीब पालकों एवं रिश्तेदारों के सामने आगे की यात्रा का संकट खडा हो गया। जीआरपी सूत्रों के अनुसार सुबह का नाश्ता श्रम विभाग ने करवाया था। उसके बाद सभी को यहां से ले जाया गया था। दोपहर में उनके लौटने पर बच्चों के अनुसार उन्हें खाना खिलवाया गया । वापसी के लिए दोपहर में समर वेकेशन स्पेशल ट्रेन का टिकिट कुछ ने लिया था शेष की जानकारी सामने नहीं थी।
बगल में छोरा,शहर में ढिंढोरा-
श्रम विभाग की कार्रवाई भी अजीब ही सामने आई है। बगैर किसी तथ्यात्मक आधार के ही विभाग ने पुलिस के साथ मिलकर इतनी बडी कार्रवाई को अंजाम दे दिया गया। शहर में ही कई स्थानों पर गर्मी की छुट्टी में कई बच्चे काम करते देखे जा रहे हैं। यहां तक की आगर रोड उद्योगपुरी में कुछ नाबालिग ऐसे उद्योगों में रोजनदारी पर काम कर रहे हैं जहां नियमानुसार उन्हें काम नहीं करना चाहिए। यहीं नहीं श्रम विभाग के कार्यालय के नीचे ही नानाखेडा क्षेत्र में केतली लेकर बच्चे चाय बेचते देखे जा सकते हैं।
नाबालिगों से तूम जैसे शब्दों से बात की-
दोपहर में अहमदाबाद रवाना हुए नाबालिग एवं उनके साथ के लोगों से जैसे तैसे कुछ मिडियाकर्मी चर्चा करने पहुंचे तो उन्होंने कैमरे पर आने से मना कर दिया। व्यस्कों ने तो मुंह ही बंद कर लिए थे। कुछ नाबालिग यह जरूर कहते रहे कि पूछताछ में उन्हें तूम और तेरा पिता क्या करता है जैसे सवाल पूछे गए,जबकि बिहारी स्थिति के बच्चे पूरे समय आप से संबोधन कर रहे थे।
नागदा में जीआरपी ने चेताया किसी ने नहीं सूनी-
इधर सामने आया कि अंत्योदय एक्सप्रेस ट्रेन से उतारे गए सभी 44 लोग शुक्रवार दोपहर में स्वयं के व्यय से सामान्य टिकिट लेकर अहमदाबाद रवाना हुए हैं। यह भी सामने आ रहा है कि नागदा में गुरूवार रात को अंत्योदय एक्सप्रेस को रोकने एवं कार्रवाई के दौरान जीआरपी के एक जिम्मेदार ने नाबालिग एवं उसके पालक का आधार कार्ड देखने के बाद पूरे मामले पर ही सवाल उठाया था लेकिन उसकी एक नहीं सूनी गई ।
– श्रम विभाग की सूचना पर जांच में सहयोग करने पहुंचे थे। जांच उन्होंने ही की है। सहयोग स्तर पर ही पुलिस ने काम किया ।
-दिपिका शिंदे,सीएसपी माधवनगर,उज्जैन
-श्रम विभाग एवं बाल विकास सोसायटी इसकी जांच कर रहे थे जांच में कुछ नहीं निकला। दोपहर में सभी स्पेशल ट्रेन से अहमदाबाद के लिए रवाना हुए हैं। सुबह श्रम विभाग ने बच्चों को नाश्ता एवं खाने की व्यवस्था की जानकारी लगी थी। दोपहर में वे अपने स्तर पर ही अहमदाबाद के लिए रवाना हुए हैं।
– अमित कुमार भावसार ,थाना प्रभारी जीआरपी,उज्जैन